छत्तीसगढ़ के इस औद्योगिक जिले में पर्यटन से बदलेगा विकास का परिदृश्य….मानसून की हरियाली, झरनों की करलव संगीत और एक से बढ़कर एक स्थल सैलानियों का मोह रहे है मन

Tourism रायगढ़।
छत्तीसगढ़ के पूर्वी भाग अंतिम छोर ओड़िसा से लगें रायगढ़ जिले में प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की भरमार है। यह जिला औद्योगिक तथा काले हीरे यानी कोयला के प्रचूरता के लिए प्रसिद्धि है। यहां प्रकृति की नरसैंगिक दृश्य भी है। जो अपनी अद्भुत विहंगम छटाओं के लिए जाना पहचाना जाता हैं। देश के मानचित्र में स्वयं को स्थापित भी किया हैं। जिसके पहाड़ों को चीरते हुए झरने के कलवित सुर छंद ताल की भांति ध्वनियों से मन मस्तिक को गुलजार, तरो ताजगी से परिपूर्ण करता है। प्रकृति पर्यावरण, रायगढ़ जिले में कई दार्शनिक स्थल है। जिसमे आस्था, देशभक्ति देश प्रेम, प्रकृति पर्यावरण की अनोखे गाथा को भी बयां करने वाले स्थल रोमांचित करते है। श्रद्धालुओं के साथ पर्यटक क्षेत्र की हरियाली आस्था और उम्दा पर्यावरण के चलते हर दिन बड़ी संख्या में पहुंचते है। लोग अक्सर घूमने फिरने के लिए एेसी जगहों पर जाना पसंद करते हैं जहां पर प्राकृतिक सुंदरता हो, प्रकृति और इससे जुड़े तथ्यों से बेहद नजदीक हो, उन सभी वादियों से जिससे हर कोई प्रकृति की ओर मनमोहक मनोरम परिदृश्य से आकर्षित होकर खींचा चला आए ।

विश्व के हर देश पर्यटन के लिए देश को झोंक रहा है ताकि विकसित विकास की गतिशीलता को आगे बढ़ाया जाए।
सैलानियों के आने स्थानीय कारोबार से आजीविका और ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था शहर तक जुड़ेगी।
पर्यटन और इसके माध्यय से विकास के लिए रायगढ़ की धरोहर चारो ओर से माकूल है। रायगढ़ जिले में यू तो कई पर्यटन की दृष्टिकोण से दर्जनों स्थल है परंतु इनमें से कुछ ऐसे भी रमणीय स्थल है जो जिले को मानचित्र के पटल पर सजोंकर रखा हुआ। जिसमें प्रकृति छंटाओ के बीच बसा गोमर्डा अभ्यारण, रामझरना, आस्था और देशभक्ति के लिए बंजारी धाम, तपो भूमि सत्यनारायण धाम, केलो बांध, मनोकामना सिद्धि महानदी तट प्रसिद्ध देवीय स्थल चंद्रपुर की नगरी चन्द्रहासनी नाथल दाई मन्दिर है। यह स्थल यहां आने वाले पर्यटकों को प्रकृति के बीच घंटो बांधे रखता है।
ये प्राकृतिक वादियों और दशर्नीय स्थल करती है हर वर्ग को मोहित
रामझरना

शहर से लगभग 18 किलोमीटर दूर रायगढ़ बिलासपुर पुराना नेशनल हाईवे मार्ग पर है।रामझरना की महत्ता आदिकाल से है। यहां साल के 12 माह पर्यटक दूर दूर से आकर प्राकृतिक वादियों का मनोरम दृश्य का लुफ्त उठाते है। यह एक मनोरम पर्यटन स्थल के साथ पिकनिक स्पाट भी है।इस स्थल का सीधे जुड़ाव प्रभु श्री राम के वनवास काल से है।
केलो बांध

धन धान्य से जिला को परिपूर्ण करने के लिए राज्य शासन ने केलो नदी पर स्व दिलीप सिंह जूदेव के नाम से केलो बांध परियोजना को आस्तित्व में लाया है। यह बांध शहर से मात्र 14 किलोमीटर की दूरी रायगढ़ अम्बिकापुर मार्ग में है। केलो बांध को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहां पर्यटकों को लुभाने के लिए पार्क का निर्माण कराया है इस पार्क को चारों ओर पानी ही पानी है जो प्रकृति की वादियों अनुभूति करवाता है।
यहां पर्यटकों की संख्या हर दिन बढ़ रही है।
माँ मानकेशरी मंदिर फोटो

शहर से 19 किलोमीटर दूर जाम गांव बस्ती में मौजूद मां मानकेसरी का दरबार है यहआस्था का केंद्र है है इसकी लोक कथा भी चर्चित है। वर्षों से प्रख्यात यह मंदिर नवरात्रि व अन्य मौके पर मेले का आयोजन भी स्थानीय लोग करते है जिसमें ओड़िसा से भी भारी संख्या में भक्त गण आते है।मंदिर के आस पर प्राकृतिक छटा नदी की अद्भुत संगम होने के कारण लोग हर माह बड़ी संख्या में सैर सपाटा के लिए आते हैं।
माँ चंद्रहासिनी दरबार फोटो

जिला मुख्यालय से लगा हुआ पड़ोसी जिला जांजगीर चांपा में मां चंद्रहासिनी का दरबार उसकी ख्याति देश भर में विख्यात है यह शहर से लगभग 28 किलोमीटर दूर पर मौजूद है। यह आस्था का एक निपुण केंद्र है यहां हर दिन बड़ी संख्या में मन्नत मांगने व माता का दरबार मे मत्था टेकने आते है।
पोरथ धाम सरिया

रायगढ़ जिले से अलग होने के बाद नवगठित सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के अधीन सरिया तहसील अंतर्गत पूर्व धाम की ऐतिहासिक महत्व है यह महादेव के किनारे स्वयंभू भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित हुई थी तत्पश्चात इस मंदिर का स्वरूप दिया गया है। यहां तीन नदियों का संगम है। मकर संक्रांति पर्व में छत्तीसगढ़ का पहला मकर मेला आयोजित होता है। जितना हर साल लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं
माडोसिल्ली जलप्रपात सारंगढ

सांरगढ़ में मौजूद गोमर्डा अभयारण्य पर्यटकों के लिए कुछ
काफी खास महत्व रखता है जो सीधे वन्य जीव व प्रकृति से जोड़ता है यहां खुली जिप्सी पर्यटक घूमकर
जंगली जानवर बाइसन, नीलगाय, मोर,भालुओं, चीतल, तेंदुओं एवं अन्य वन्य जीव को नजदीक से देख तथा फोटो ग्राफी भी कर सकेंगे। साथ ही माडो सिल्ली का झरना देखकर रोमांचित भी होंगे। और रुकने की भी व्यवस्था है।
आस्था देशभक्ति बंजारी धाम और मानचित्र तालाब

रायगढ़ से करीब 20 किलोमीटर दूर बंजारी माता मंदिर है। सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर के तालाब को छत्तीसगढ़ वरन सम्भवतः देश मे एक अनोखा स्वरूप में उकेरा गया है। जिसमे कला के बेजोड़ कलाकृतियों को प्रदर्शित कर रहा है।भारत का मानचित्र बनाया गया हैं। इसके अलावा उक्त मानचित्र में छत्तीसगढ़ को भी दर्शाया गया है। यह फलीभूत राष्ट्रीय स्तर में दर्ज मानचित्र के अनुरूप है।
जिले में पर्यटन के अपार संभावनाएं विकसित करने इच्छा शक्ति की दरकार
औद्योगिक जिले में पर्यटन के अपार संभावना है जो लोगों को बहुतयात संख्या में हर वर्ष अपनी और समेट कर ले आएगा। यहां दूर दूर से लोग उद्योगों में छोटे बड़े पद पर कार्यरत होकर काम करने आते है। वहीं लोगो की आवाजाही के बीच पर्यटन स्थल को सुदृढ किया जाए तो रायगढ़ का नक्सा औद्योगिक हब के साथ पर्यटन हब में भी नजर आएगा। जबकि इसके लिए केवल मजबूत इरादे और इच्छा शक्ति की दरकार है। देखा जाए तो जिले में पर्यटन स्थल को विकसित व सूचना केंद्र स्थापित नहीं होने से लोग जिला मुख्यालय आकर वापस जानकारी के अभाव में लौट जाते हैं। अगर पर्यटन स्थल का विकास किया जाए तो पर्यटकों का रुझान बढ़ेगा और यह रुझान रोजगार बढाते हुए जिले को विकास की नई आयाम तो देगा ही वरन मानचित्र के पटल पर रायगढ़ और उभरेगा।
कैसे आए
रायगढ़ देश के विभिन्न बड़े रेलवे मार्ग से जुड़ा हैं ।
यह बिलासपुर से 150 किलोमीटर तथा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 250 किलोमीटर दूर हैं।
राजधानी रायपुर तथा बिलासपुर में एयरपोर्ट के माध्यय से हवाई सेवा भी उपलब्ध है।
रायगढ़ में सभी स्थल जाने के लिए निजी, सार्वजनिक वाहन सुविधा भी उपलब्ध है।




