छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के ‘मिनी तिब्बत’ का ‘मैनपाट’ नैसर्गिक सौंदर्य मानसून की हरियाली लुभा रहा पर्यटकों को

मैनपाट में जलप्रपात, उल्टा पानी, हिलती जमीन देख रोमांचित होते पर्यटक, टेंट में ठहरने की सुविधा

रायगढ़
छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्से में स्थित ‘मिनी तिब्बत’ यानी मैनपाट की अप्रतिम नैसर्गिक सुंदरता और रमणीक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करने लगे हैं। श्रीनगर, शिमला, मनाली जैसे परिचित हिल स्टेशनों की श्रेणी में यह स्थान तेजी से शामिल हो रहा है। इस वनाच्छादित पर्यटन स्थल पर रात में टेंट में रहने का रोमांच मिलता है तो तिब्बती फसल टाऊ के खेतों को निहारने और सेल्फी खींचने का अवसर भी। खूबसूरत जलप्रपात और रुई के फाहों की तरह गालों को छूकर निकलते बादल मन मोह लेते हैं। गर्मियों में दोपहर में भी बहती ठंडी हवा में यहां की हरियाली निहारना अलग ही अनुभूति है।

ये हैं प्रमुख स्थलः मैनपाट पहुंचने के बाद आप 10 से 20 किमी के क्षेत्र में कई पर्यटन स्थल घूम सकते हैं। सभी स्थलों तक पहुंचने के लिए पक्की सड़कें बनी हुई हैं। प्रमुख पर्यटन स्थलों में मेहता प्वाइंट, टाइगर प्वाइंट, परपटिया, तिब्बती मठ, मंदिर, तिब्बती कैंप, टांगीनाथ का मंदिर, जलपरी, घागी जलप्रपात, लिबरा जलप्रपात हैं।

ऐसे पहुंच सकते हैं

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के लिए प्रमुख शहरों से हवाई व रेल सेवा उपलब्ध है। रायपुर से दुर्ग-अंबिकापुर ट्रेन के अलावा निजी वाहन अथवा टैक्सी से 350 किमी की यात्रा तय कर अंबिकापुर शहर पहुंच सकते हैं। लग्जरी बसें भी चलती है। अंबिकापुर से मैनपाट 40 किमी दूर है। वाराणसी से भी अंबिकापुर की दूरी 350 किमी है जो लग्जरी बसों, टैक्सी या निजी वाहन से तय की जा सकती है। अंबिकापुर से मैनपाट का रास्ता रोमांचकारी व नयनाभिराम है। इसके अलावा रायगढ़ से कापू मार्ग जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रो से घिरा रहने पर यहां से मैनपाट का रास्ता रोमांच उत्पन्न करता है।

जलजली और उल्टा पानी विज्ञान का चमत्कार

पर्यटकों को उल्टा पानी और जलजली विशेष रूप से रोमांचित करते हैं। उल्टा पानी में नीचे से पहाड़ की ऊपरी दिशा की ओर पानी बहता है। गुरुत्वाकर्षण का अद्भुत दृश्य यहां देखने को मिलता है। उल्टा पानी के निकट स्थित सड़क पर चुंबकीय प्रभाव के कारण न्यूट्रल किए गए चार पहिया वाहन ढाल में लुढ़कने के बजाए ऊपर की ओर चलने लगते हैं। निकट ही साल के घने जंगल के बीच स्थित जलजली पहुंचकर भी रोमांच का अनुभव होता है। यहां धरती झूले की तरह हिलती महसूस होती है।

आदिवासी और तिब्बती जीवनशैली देखें

आदिवासी और तिब्बती जीवनशैली से भी पर्यटक परिचित हो सकते हैं। यहां रहने वाली जनजाति माझी-मझवार तो अध्ययन का विषय है। वहीं तिब्बती समुदाय के लोगों से भी उनकी संस्कृति के बारे में जाना-समझा जा सकता है। मैनपाट में सात अलग-अलग तिब्बती कैंप भी भ्रमण योग्य हैं। तिब्बती व्यंजनों का भी स्वाद लिया जा सकता है। बौद्ध मठ और मंदिर के भी दर्शन सुलभ हैं। पठार में तिब्बती फसल टाऊ की खेती हजारों हेक्टेयर में की जाती है। भोजन में शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजन आसानी से उपलब्ध हैं। इसके साथ ही आप छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी ले सकते हैं।

रोजगार के अवसरः

बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने से रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। युवाओं ने ठहरने के लिए टेंट लगा रखे हैं। शासकीय मोटल के साथ निजी होटल व रिसार्ट खुल चुके हैं।

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