छत्तीसगढ़सारंगढ़ बिलाईगढ़

कलेक्टर डॉ कन्नौजे ने जैविक खेती करने वाली महिला किसान गोपिका प्रधान के कार्य को सराहा

कलेक्टर ने अन्य किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए

सारंगढ़ बिलाईगढ़, कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे ने बरमकेला ब्लॉक के सुदूर गांव जालाकोना पहुंचकर जैविक खेती करने वाली महिला किसान गोपिका प्रधान को प्रोत्साहित किया। कलेक्टर डॉ कन्नौजे ने न केवल उनके मैदानी भूमि (टिकरा) में जैविक खेती से उत्पादित मिर्ची की फसल को देखा ,

उनके तैयार कर रहे सभी आयुर्वेद, जीवामृत, नीम पत्ती, गुड़, हल्दी आदि से बने और बना रहे जैविक उत्पाद का अवलोकन किया। इस दौरान कलेक्टर ने महिला किसान गोपिका प्रधान के जैविक खेती का अच्छा प्रदर्शन करने पर उनके कार्य का तारीफ किया। उन्होंने कहा कि “वास्तव में ऐसे प्रयोग ही जैविक खेती के आंदोलन को जन-जन तक पहुंचा सकते हैं।

उन्होंने महिला किसान से आग्रह किया कि वे अन्य किसानों को भी जैविक उत्पाद निर्माण की तकनीकें सिखाएं और जैविक खेती के लाभों से परिचित कराएं। टिकेश्वरी महापात्र ने बताया कि हमारे द्वारा निर्मित प्राकृतिक दवाई को किसान खरीद रहे हैं और अपने खेत में डाल रहे हैं। जीवामृत खाद का काम करता है। नीमास्त्र कीटनाशक का काम करता है।

कलेक्टर को कृषि बीआरसी और बिहान की महिला सदस्य टिकेश्वरी महापात्रा ने फसल में कितना जैविक अब तक दे चुके और फसल के कौन सी अवस्था में क्या जैविक उत्पाद का छिड़काव करेंगे, इसकी जानकारी कलेक्टर को दी। इस दौरान कलेक्टर के साथ सीईओ जिला पंचायत इंद्रजीत बर्मन, डिप्टी कलेक्टर अनिकेत साहू, उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव, सहायक संचालक उद्यानिकी आकांक्षा उपाध्याय, सीईओ जनपद पंचायत बरमकेला अजय पटेल उपस्थित थे।

जैविक खेती करने वाली महिला किसान गोपिका प्रधान को विश्वास नहीं था कि उनके उत्पाद को देखने जिले के मुखिया कलेक्टर उनके दूरस्थ गांव जालाकोना पहुंचकर उनके घर आंगन टिकरा आदि का अवलोकन करेंगे और अधिकारियों को किसानों के हरसंभव मदद के लिए निर्देश देंगें। यह अप्रत्याशित घटना से दूरस्थ गांवों के किसानों के बीच नई ऊर्जा का संचार किया है और जैविक खेती के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों के मन में जैविक खेती करने का विचार आया है।

किसान अब जैविक खेती और वर्तमान समय में वृहद स्तर पर किए जा रहे रासायनिक खाद के उपयोग की खेती के अंतर और होने वाले बीमारी आदि को समझने लगे हैं। रासायनिक खाद के उपयोग से बीपी, शुगर, कैंसर, हृदय रोग आदि बीमारी की संभावना कितनी बढ़ जाती है। उल्लेखनीय की जैविक खेती में रासायनिक पदार्थ का उपयोग नहीं किया जाता, इससे बीमारी की संभावना नहीं रहता, जबकि रासायनिक खाद के उपयोग की खेती में रसायन की मात्रा फसल, दाल चावल में रहता है जिससे बीमारी की संभावना बनी रहती है।

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