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फोन-पे पर ₹1000 की रिश्वत! बरमकेला BEO कार्यालय में भ्रष्टाचार का खुला खेल

बिना सूचना के महिला शिक्षक का वेतन रोका, शिकायत पर भी नहीं हुई कार्रवाई

बरमकेला/सारंगढ़। विकासखंड शिक्षा कार्यालय बरमकेला एक बार फिर विवादों में है। सहायक शिक्षक चित्रसेन साव, प्राथमिक शाला लेंधर जोरी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और महिला सम्मान की पोल खोल दी है।

आरोप है कि BEO कार्यालय के संविदा लिपिक प्रमोद साहू द्वारा वेतन निकालने के एवज में ₹1000 की रिश्वत फोन-पे जैसे डिजिटल माध्यम से ली गई, जिसका स्क्रीनशॉट सबूत के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

आश्चर्य की बात यह है कि उक्त संविदा कर्मचारी का मूल विभाग जिला पंचायत रायगढ़ है, न कि शिक्षा विभाग, फिर भी उसे वेतन प्रभार जैसे अत्यंत संवेदनशील कार्य सौंपा गया है, जबकि कार्यालय में कई नियमित वरिष्ठ लिपिक एवं सहायक ग्रेड-2 अधिकारी कार्यरत हैं।

महिला कर्मचारी का 100% वेतन रोका

शिकायत में उल्लेख है कि बिना किसी वैध कारण, बिना नोटिस और बिना सुनवाई का अवसर दिए, एक महिला शिक्षक का जुलाई 2025 का पूरा वेतन रोक दिया गया। इससे महिला कर्मचारी मानसिक रूप से टूट गई है। उनका आरोप है कि यह कार्य महिला होने के कारण जानबूझकर प्रताड़ना की नीयत से किया गया है।

सेवा नियमों, कोषालय नियमों का खुला उल्लंघन

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह कार्य न केवल छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 और कोषालय नियम का उल्लंघन है, बल्कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का भी खुला हनन है।

BEO नरेंद्र जांगड़े की भूमिका संदिग्ध

BEO नरेंद्र कुमार जांगड़े पर आरोप है कि उन्होंने बिना किसी वैध प्रक्रिया अपनाए, वेतन वृद्धि भी रोक दी और शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत आवेदन को दरकिनार कर दिया।

इस पूरे मामले को लेकर सहायक शिक्षक फेडरेशन अध्यक्ष पवन पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष नंदकिशोर पटेल, संयोजक सुभाष चौहान सहित कई कर्मचारी संगठनों ने गहरा आक्रोश जताते हुए DDO अधिकार समाप्त करने और उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर कार्रवाई की मांग की है।

महिला आयोग में शिकायत की तैयारी

महिला शिक्षक ने इस प्रकरण को महिला उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के तहत मानते हुए राज्य महिला आयोग एवं आंतरिक शिकायत समिति (ICC) में शिकायत दर्ज करने की घोषणा की है।

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