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पीएफएमएस घोटाला: शिक्षक खुद बने ‘वेंडर’, घरघोड़ा ब्लॉक में विकास राशि का बंदरबांट

सुनहरे भविष्य को बिगाड़ने डाल रहे है बच्चों के हक पर डाका कहीं पत्नी के खाते में ,तो कहीं दूसरे शिक्षकों के खाते में जा रहे पैसे

शासन द्वारा शाला विकास अनुदान के तहत राशि दिया जाता है ताकि स्कूलों में छोटी बड़ी जरूरत की और अन्य कार्यो को पूरा कराया जा सके। जिससे स्कूल की व्यवस्था बरकरार रहे। इस पीएफएमएस के माध्यम से स्कूलों के प्रधानाचार्य राशि का उपयोग शाला विकास के मद्देनजर करते है। इस राशि के दुरुपयोग कर रहे है। भारत के सुनहरे भविष्य को बिगाड़ रहे हम

रायगढ़। स्कूलों में मिलने वाले पीएफएमएस राशि का बंदरबाट कर गड़बड़ी करने का मामला उजागर हो रहा है। जिसमें  घरघोड़ा ब्लाक के कई स्कूलों में पीएफएमएस के माध्यम से भेजी गई विकास की राशि  शिक्षक न केवल स्वयं के खाते में राशि ट्रांसफर कर रहे हैं, बल्कि अपने ही परिवार के सदस्यों को फर्जी वेंडर बनाकर भी भुगतान कर रहे हैं। इसकी पुष्टि कई दस्तावेज के माध्यम हो रही है। इस तरह  शिक्षक खुद ही खरीदार भी हैं और आपूर्तिकर्ता भी बन रहे है। यह सुनियोजित भ्रष्टाचार की बयानगी कर रहा है।.

शासन द्वारा शाला विकास अनुदान के तहत राशि दिया जाता है ताकि स्कूलों में छोटी बड़ी जरूरत की और अन्य कार्यो को पूरा कराया जा सके। जिससे स्कूल की व्यवस्था बरकरार रहे। इस पीएफएमएस के माध्यम से स्कूलों के प्रधानाचार्य राशि का उपयोग शाला विकास के मद्देनजर करते है। इस राशि के दुरुपयोग करने के लिए 

घरघोड़ा समेत अमूमन सभी तहसील में स्कूलों की जरूरतों के नाम पर बनाई जा रही खरीदी की फाइलें सिर्फ कागजों में चल रही हैं। फर्जी बिल तैयार कर, शिक्षक रजिस्टर्ड फर्मों के बजाय खुद के रिश्तेदारों या जान-पहचान वालों के नाम से भुगतान कर रहे हैं। कई मामलों में जीएसटी नंबर ही नहीं है, जिससे शासन को राजस्व में सीधा नुकसान हो रहा है। सामग्री स्कूलों तक नहीं पहुंचती, पढ़ने वाले बच्चों को इसका लाभ नही मिल पाता है और सरकारी व्यवस्था को पालकगण कोसते है। बोगस बिल से यह राशि का बंदरबांट हो रहा है। लेकिन बैंक खातों में  रकम ट्रांसफर हो जाती है। विभागीय मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार संभव होना बेइमानी प्रतीत हो रहा है।

जिसमें शिक्षा विभाग की योजनाओं का खुला मज़ाक उड़ाया जा रहा है। अभी तक किसी भी उच्चस्तरीय जांच की पहल न होना कई सवाल खड़े करता है। अगर सूक्ष्मता से निष्पक्ष जांच हो, तो लाखो के घोटाले का पर्दाफाश होना तय है।

फर्जी बिल, बिना जीएसटी के हो रहा है भुगतान 

स्कूलों की जरूरतों के नाम पर बनाई जा रही खरीदी की फाइलें सिर्फ कागजों में चल रही हैं। फर्जी बिल तैयार कर, शिक्षक रजिस्टर्ड फर्मों के बजाय खुद के रिश्तेदारों या जान-पहचान वालों के नाम से भुगतान कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और राशि  का सही उपयोग करने के लिए ही पंजीकृत फर्म से ही सामान करने का शासन नियम बनाया है लेकिन इसे दरकिनार किया जा रहा है।

क्या कहते है अधिकारी

इस संबंध में शिकायत मिली थी जिसकी जांच की जा रही है। गलत पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।डा व्ही के राव, जिला शिक्षा अधिकारी

डा व्ही के राव, जिला शिक्षा अधिकारी

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